मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ मानसिक रोगों की अनुपस्थिति नहीं है। इसके विपरीत यह व्यक्ति दैनिक जीवन का सक्रिय और निश्चित गुण है। यह गुण उस व्यक्ति के व्यवहार में व्यक्त होता है। जिसका शरीर और मानसिक एक ही दिशा के साथ-साथ कार्य करते हैं उसके विचार, भावनाएं और क्रियाएं एक ही उद्देश्य की ओर सम्मिलित रूप से कार्य करती हैं। मानसिक स्वास्थ्य कार्य की ऐसी आदतों, व्यक्तियों तथा वस्तुओं के प्रति ऐसे दृष्टिकोणों को व्यक्त करता है जिनसे व्यक्ति को अधिक संतोष और आनंद प्राप्त होता है।
यदि शरीर स्वस्थ्य हो और मन असंतुलित हो तो व्यक्ति जीवन में न तो सुख अनुभव कर सकता है और नहीं अपनी क्षमताओं का विकास कर सकता है। आज के आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक और तकनीकी युग में मनुष्य ने भौतिक प्रगति को बहुत कर ली है, परंतु मानसिक शांति संतुलन लगातार चुनौती बनते जा रहे हैं इसी कारण वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण सामाजिक शैक्षणिक और चिकित्सीय विषय बन गया है।
आज की जीवन शैली तेज गति से बदलते समाज बढ़ती अपेक्षाएं, परीक्षा एवं कैरियर का दबाव, पारिवारिक विघटन, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग और पर्यावरण तनाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहे हैं। अभी भी लोगों में मानसिक रोगों को लेकर अनेक भ्रांतियां बनी हुई है जिससे के कारण समय पर उपचार नहीं हो पता है।
मानसिक स्वास्थ्य की समझ, जागरूकता, समय पर पहचान उचित उपचार और सकारात्मक जीवन शैली अपनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
आज यह स्पष्ट हो चुका है कि स्वच्छ पर्यावरण, हरित परिवेश, और प्रकृति से जुड़ाव मानव मन को शांति, संतोष और स्थिरता प्रदान करता है। अवसाद, चिंता, विकार, नशे की लत, आत्महत्या की प्रवृत्ति पर नियंत्रण समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन रक्षक बनती है।